Sunday, 4 March 2012

तुम कौन हो जो मेरे आस पास रहते हो


तुम कौन हो
हमेशा मेरे आस पास
ही रहते हो हमेशा
कभी मुझे समझाते हो
बहलाते हो झिडकते हो स्नेह से
रुलाते हो कभी
तो कभी खुद भी आंसूं बहाते हो
तन्हाइयों से लड़ने की हिम्मत देते हो
चुपके से आकर मुस्कराते हो
कुछ न कहते हुए भी
सब कह जाते हो
न जाने कब तक गूंजती रहती है
अनकही बातें कानों में
नहीं जानती कौन हो तुम
शायेद अनदेखा अनजाना
मेरे ख्वाबों की कल्पना है
जो दबे पाँव मेरे
ख्वाबों के आंगन में आता है
इक ख्वाब सा दिखा जाता है
तन्हाइयों से लड़ने की
हिम्मत दे जाता है ........................दिव्या

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