Sunday, 25 March 2012

मीत हो न तुम मेरे पिछले जनम वाले ?


मीत हो न तुम मेरे पिछले जनम वाले ?

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सुनो ! एक बात कहूँ ?
दिल आज भी बस
यह सोच कर ही
धड़क जाता है ---
कि तुम मेरे मीत हो
वो पिछले जन्म वाले
सब कहते है बावली हूँ मै
ख्यालों में एक तस्वीर
बना रखी है मैने और
रात रात भर न जाने
किस अनदेखे साये से
बतियाती रहती हूँ
बावरे तो वो है
उन्हें क्या पता
हम भले ही मिले नहीं
पर एक रूहानी अहसास तो है
जो रात के सन्नाटे में ---
मेरे पास रहता है
चाँद का सरहाना
तारों की चादर बना
हम रोज़ रात
ढेरो बातें करते हैं
आसमां से फरिश्ते
झांकते है और मुस्कराते हैं
गवाह हैं न वो हमारे
न जाने कितने
सुख दुःख बांटे है न
तुम्हारे काँधे पे सर रख कर
पर हर रोज़ सुबह की पहली किरण
आते ही तुम चले जाते हो
फिर आने का वादा करके
मै फिर इंतज़ार करती हूँ
पता है मुझे भी ये
मेरे ख्वाबों की दुनिया है
जिसमे एक पात्र तुम भी हो
अनदेखे अनजाने मेरे मीत
मेरे पिछले जनम वाले
मै तुम्हें इसी नाम से
बुलाती हूँ न -------
पता है क्यूं ???नहीं न
नाम जो नहीं जानती तुम्हारा
देखो अब तुम भी मुझे बावरी न कहो
रूठ जाऊँगी मै तुम से ---
ओह देखो अब सुबह भी हो गई -----------
मुझे विदा कहना नहीं आता
मुझे तो बस ख्वाबों में
जीना आता है --जीने देना मुझे
आते रहना ख्वाबों में रोज़
ओ मेरे पिछले जनम वाले ----
---मेरे मीत ----आते रहना

-------------दिव्या ---------------------


12 comments:

  1. बहुत सुन्दर !

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    1. di ... !! मै तो आपकी चांदनी सी शीतल मन को सुकून के समंदर में ले जाती प्रथम पंक्ति में ही खो गयी हूँ ... “मीत हो न तुम मेरे पिछले जनम वाले ??” चिर आनंदित करने वाला एक अहसास ... पर्याप्त है जीवंत महसूस करने के लिए ...बहुत ही प्यारी रचना ...आपको प्रतिक्रिया देना मेरे लिए चराग को रौशनी दिखाना होगा दी .... बहुत बधाई !!

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    2. Neeta -------बहुत अच्छा लगा तुमने पढ़ा और पसंद किया --प्रतिक्रिया तो अमूल्य होगी तुम्हारी ---हमेशा ही दी के लिये ...

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  2. Mene Likhna chod diya h ...... kyuki kya likhu sab dil ki bat to aap likh deti h ... suparb

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  3. बहुत खूब ...कल्पना की अनुपम उड़ान ....
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    ओह देखो अब सुबह भी हो गई -----------
    मुझे विदा कहना नहीं आता
    मुझे तो बस ख्वाबों में
    जीना आता है --जीने देना मुझे
    आते रहना ख्वाबों में रोज़
    ओ मेरे पिछले जनम वाले ----
    ---मेरे मीत ----आते रहना
    --------
    आपकी लेखनी के समक्ष नतमस्तक हूँ मैं ....बधाई दिव्या जी एक सुन्दर रचना के लिए ...

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  4. एक स्त्री की कोमल भावनाएं , सुन्दर ; दिव्या जी ....

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  5. बहोत सुन्दर दीदी .............

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  6. आध्धात्मिक प्रेम की अनुपम व्याख्या....वाह..
    सत्यमं,शिवमं,सुंदरमं.....का अनोखा..वर्णन।

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  7. Apne sapno ko jinda rakhiye us bawre meet ke liye!!Beautiful ,lajawab!!

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  8. सुनो ...जल्दी मिल जाओ..मिट मेरे पिछले जन्म वाले ...
    इंतज़ार काटे नहीं कटती ...!!

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