Saturday, 17 March 2012

बस हल्का सा ही तो बदलाव आया है --


बस हल्का सा ही तो बदलाव आया है - इतना तूफ़ान मचा है -आखिर क्यूं ????
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इक बात कहूँ !! हम स्त्रियों का मन एक सा ही होता है
कभी कभी जब वो मन बहुत भर जाता है तो अहसास शब्द
बन कर निकल आते है ------हर किसी का एक आसमां है
किसी के पास है ---तो किसी को तलाश है ------अरसे से बेजुबान रही --
अब जब कुछ ने ज़ुबान पाई ---तो बेलगाम कहलाई ----
तभी तो कहा ---काम वाली बाई हो या पढ़ी लिखी शहर की नारी
एक ही सी तो हैं हम कहीं न कहीं से ---वही छटपटाहट ---
कभी कभी तो लगता है वो बेहतर समझती है हम से --
आज सुबह ही दुर्गा पोंछा लगाते हुये बडबडाती जा रही थी
[ मै किसी से कम हूँ क्या खुद हाड़ तोड़ कमाती हूँ
किसी से कुछ लेती नहीं उल्टा देती हूँ फिर क्यूं सुनू ]
उसके शरीर पर पड़े नीले निशान सब बता चुके थे
फिर भी मैने कहा तुम पुलिस में रिपोर्ट कर दो
छोड़ दो उसे ------ उसका जवाब था नहीं दीदी जाने दो
है तो मेरा ही मर्द कहाँ जायेगा--- उस बेवड़े का कौन
ख्याल रखेगा मेरे सिवा --------और मै स्तब्ध रही सोचती रही ----
क्या बदला है ----बस हल्का सा बदलाव ही तो आया ----
और इतना तूफान मचा है आखिर क्यूं ??? -----
----------------------दिव्या ------------------------------------