Sunday, 4 March 2012

कुछ पन्ने अभी खाली हैं

मोहब्बत तुम्हारे लिये इक 
पन्ना है जिसे पढ़ा और 
चुपके से मोड़ दिया 
मगर मेरे लिये 
मोहब्बत पूरी किताब है 
जिसे चाह कर भी
मै नहीं मोड़ सकती
हर पन्ने पर कुछ दर्ज है
कुछ सुखद कुछ दुखद
हर रोज़ ही दोहराती हूं
किसी मुकद्दस किताब कि तरह
खोजती हूं किसी पन्ने पर
कुछ वो लम्हे मिल जायें
जो देह की परिभाषा से
उपर उठ कर आत्मा
की गहराइयों में उतरे हों
पर नहीं मुझे नहीं मिले वो
शायेद इसीलिए इस किताब के
कुछ पन्ने अभी भी खाली है
*****दिव्या ***********