Sunday, 4 March 2012

सुनो अब बस भी करो न




किस सोच में हो
इतनी उदास सी क्यूं हो
क्या चल रहा है मन में
चेहरा क्यूं उतरा है
कौन है वो कहाँ है वो
कुछ कहा क्या उसने
कहाँ चला गया वो
क्यूं सर्द है तेरे ज़ज़्बात
बरसात तो हुई नहीं
फिर क्यूं भीगा है ये आंचल
क्यूं नहीं आया वो
ऐसे अनगिनत सवालात
मेरे पास नहीं हैं जिनके जवाब
चाँद तारे ये हवा सब
मुझसे बार बार पूछ्तें हैं
क्या कहूँ सब से बोलो ???
तुम ही बताओ अब क्या कहूँ ??
कहाँ हो तुम ??-----
वापस आ जाओ न
सुनो ! अब बहुत हो गया ----
अब बस भी करो न
-----------दिव्या ---------------------------------