Sunday, 4 March 2012

ख़ामोशी का खूबसूरत अहसास


पहरों बैठी सोचती हूं
वक्त को कैसे कैद करूँ !
ख्वाबों की खिड़की में मेरा दिल
इक परिंदे की तरह सहमा सा
अपने परों को समेटे हुए
अपने ज़ज़्बात छुपाये हुए
न जाने कब तक बैठा रहता है
दूर आकाश को ताकता हुआ !
दूर तक फैली हुई ख़ामोशी
ख़ामोशी का खूबसूरत सा अहसास
और दिशाहीन सा मेरा अस्तित्व
हवा में इक सुगंध कि तरह
घुलने लगता है
सूखे पत्ते सा मेरा वजूद
तेरी याद की आंधी में
उड़ने लगता है
अचानक दिल मध्यम सुर में बोलता है
वक्त तो बहुत था मेरे पास
पर अपने हाथ में कब था
*************दिव्या ************************