Sunday, 4 March 2012

कल रात तुम्हारी याद



कल रात तुम्हारी याद को हम
चाह के भी सुला न पाये
रात के पहले पहर ही
सुधि तुम्हारी घिर कर आई
अहसास मुझको कुछ यूँ हुआ
पास जैसे तुम हो खड़े
व्याकुल हुआ कुछ मन फिर ऐसे
ज्यूँ चांदनी में चाँद जले
छवि तुम्हारी झलक रही थी
आसमां के बादलों में
कल रात तुम न जाने क्यूँ
न चाह के भी फिर याद आये
********* दिव्या ***********