Monday, 12 March 2012

ओ पाँखी ! एक संदेस पहुंचा दे पिय तक


ओ पाँखी ! एक संदेस
पहुंचा दे पिय तक
फूलों , तितलियों और
आकाश के इन्द्रधनुष से सातों रंग ----
चुरा लाइ हूँ मै पहली बार
सिर्फ तुम्हें रंगने को
बस एक बार भीग लो न
इन रंगों में -----
ये रंग न उतरेगा कभी
तुम जाओ कही भी
प्रिय मै तुम्हारे पथ का
विघ्न न बनूँगी ----
मै तो इन रंगों में
घुल कर तुम्हारी
साँसों में मह्कूँगी
नहीं रोकूँगी मै तुम्हें
बस पलकों में तुम्हारी
छवि मूंद लूंगी
बस इक बार भीग लो न
इन रंगों में ---------------
-------------दिव्या ---------------------