Sunday, 4 March 2012

ओह तुम्हारे अहसास कब बदल गये

अरे कुछ भी तो नहीं बदला यहाँ 
फिर तुम्हें ऐसा क्यूं लगा ??
ओह तुम्हारे अहसास बदल गये 
और मुझे पता भी न चला 
कब और क्यूं हुआ ?कैसे हुआ ?
अरे ! बता तो देते मुझे ख़ैर कोई बात नहीं
थोड़ा दर्द तो हुआ दिल में --------
छले जाने का अहसास भी
क्यूं की सच में मुझे नहीं पता
यह तुम्हारी आदत है या फितरत
पर मुझे कुछ वक्त लगेगा भूलने में
जब यादें जड़ें पकड़ लेती है न
तब ज़रा मुश्किल होता है न भुलाना
पर मै तुम्हें अब थोड़ा थोड़ा भूलने भी लगी हूँ
तुम तो जानते ही हो न ???
मै अगर चाहूँ तो कुछ भी कर सकती हूँ
अब खुश हो न ---जाओ तुम भी क्या याद करोगे
मैने आज़ाद किया तुम्हें अपनी यादों से
मेरे मन में कोई दुर्भाव नहीं है
बस एक सदमा सा लगा पल भर को
और हाँ तुम भी कोई अपराध बोध न पालना
वैसे तुम्हें होगा भी नहीं ये मुझे पता है
बस मेरी एक ही तमन्ना है छोटी सी
तुम मुझे हरदम याद करो -------------
और मै तुम्हें कभी भी न पहचानूं -------

---------------दिव्या --------------------------------