Sunday, 4 March 2012

और वो फूल तुम हो


मेरी बालकनी में
कैक्टस का  एक पौधा  है
वो मै हूँ ----------
उस पर जो खिला है न
वो फूल तुम हो ------
जो साल में बस
एक बार ही खिलता है
बड़ा नाज़ुक होता है न
कितनी जल्दी मुरझा जाता है
बिलकुल उसी तरह से
जैसे मेरी किसी बात से
तुम्हारा चेहरा उतर जाता है
मेरी बालकनी में एक कैक्टस
मुझ  जैसा  ------------------------
और उस पर खिला फूल ----
बिलकुल तुम जैसा ----------
---------------दिव्या -------------------------