Tuesday, 10 April 2012

बरौनियों तले उदास दो आधे चाँद !

बरौनियों  तले  उदास  दो आधे  चाँद !
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-----गुमसुम से -------------
----कहीं खोये से थे बरौनियों तले ----
------- उदास से दो चाँद -------
उन्हें न ऊँघ लगती है--------- न नींद
यकबयक न जाने क्या सोच कर ------
----आंसुओं की नमकीन ---
धार बहने लगी --------------
--तभी आसमां का चाँद -------
-----रात को साथ ले कर आया ----
बोला अरे पागल आँखों वाली
छोटे मोटे दर्द -----
--- सहन करने की ---
तो आदत है न तुम्हें -------
उलझे ख्वाबों वाली सुनो
इन ख्वाबों को ----
---अब दफना दो ---
मत उदास हो ----मिलते हैं
इक नई भोर के साथ ---
---चांद ने कहा ----और
सुबह के हवाले कर ------
---रात को साथ ले --
चला गया चाँद --------
फिर आने का वादा कर -----
-----------दिव्या ----------------------