Tuesday, 10 April 2012

कुछ नन्हे --कुछ उम्रदराज़ पल


कुछ नन्हे ---कुछ उम्रदराज़ पल
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तुम्हें तो पता है न ------ये खामोश रात
और काले अँधेरे मुझे डराते हैं ----
आज न जाने क्यों ----
तुम फिर बहुत याद आये
न जाने कितने जनम बीत गये
हमें बिछड़े हुये ---नहीं भूल पाती तुम्हें
हर पल याद करते हैं -------
ज़रा सी आँख लगी नहीं कि
---दिल पे दस्तक सी सुनाई देती है --
और हम चौंक के उठ जाते हूँ
ये सोच के तुम आ गये ---
सच कहूँ अब तुम्हें भूलना भी चाहते हैं
पर वो तुम्हारी बोलती आँखे
नहीं भूलने देती मुझे -------
जैसे कह रही हो -------
---मै आता तो हूँ ख्वाबों में ही सही ---
हमें पता है तुम्हें सब पता होगा
कम बोलना और ज्यादा जानना तो
तुम्हारी आदत है न ---------
---फिर कैसे नहीं जानोगे तुम सब
तुम्हारे साथ बीते कुछ नन्हे पल
हमने आंचल में सहेज कर बाँध लिये है
पर शायेद तुम सब भूल गये न ----
तुम्हें तो ये भी याद नहीं ---
तुमने कहा था तुम जल्दी आओगे
सुनो अब हमें मत बताना
तुम कब वापस आओगे
वरना हमारी साँसे थम जायेंगी
अब देखो न हम नींद में ---
अपना ही हाथ थामे रहे ---
तुम्हारा समझ कर ---तुम्हें तो पता है न
हमें अँधेरे से डर लगता है -----------
-----और बिना तुम्हारा हाथ थामे --
हम कहाँ सो पाते हैं ------------
उफ़ ये पल भी बीत गया
तुम्हारे साथ ख्वाबों में बात करते करते
और चाँद का वो बेचारा आधा टुकड़ा
बस हल्की सी चांदनी बिखेर पाया था
हमें ख्वाबों में तुम से बात करते देख
वो भी मुस्करा रहा था --ओह पौ फट गई
चौकन्ना सा सूरज -खिड़की की झिरी से झांक उठा
और हमारे ख़्वाब टूट गये -----------------------
--------------------------दिव्या ----------------------------------