Wednesday, 16 May 2012

हर दिन का बस एक पल मेरा हो .....


हर दिन का बस एक पल मेरा हो ---

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--------------- मुझे साल का एक दिन नहीं 
------हर दिन का बस एक पल ही देते रहना तुम सब ------------
माँ हूँ तुम्हारी मेरी जान तुम् में बसती है 
-------------मुझे पता है अब तुम सब बड़े हो गये हो
परिन्दे भी जब बसेरा बदलते हैं --------
-----तो पेड़ बहुत तन्हा हो जाता है ------
बच्चों से बड़ी तो कोई भी जागीर नहीं होती ----किसी माँ के लिये
पर मै ये भी जानती हूँ बहुत काम हैं तुम्हें ----पर क्या करूँ
-----मेरी जान तुममे बसती है ----माँ हूँ न --
तुमने कुछ खाया या नहीं --सोच कर ही
-----हाथ का निवाला गिर जाता है ---
लापरवाह हो न ---मै कैसे खा सकती हूँ बोलो ?
----तुम तो ड्राइव भी कितनी तेज करते हो ----
मै जब भी फोन करती हूँ ----जोर से हँसते हो
मम्मा मै बच्चा नहीं हूँ ----अच्छा अभी फोन करता हूँ
--------------फिर बिजी हो जाते --मै तो जानती हूँ तुम्हें ---
कभी तुम्हारा फोन न मिले तो ---तुम नहीं जानते
--------न जाने कितनी बार मर जाती है तेरी माँ ------
तेरी आवाज़ सुन कर जान मे जान आती है -----------
------रोज़ जब तक तू बिस्तर मे नहीं जाता --------
कहाँ सो पाती है माँ ----क्या करूँ दिल से मजबूर है तेरी माँ
----------मेरे लिये तो आज भी उतने ही बड़े हो तुम सब
जब पहली बार तुम्हें गोद उठाया था ---------------
------बस कुछ पल तेरे तेरी माँ की उम्र बढ़ा देते हैं --------
बस हर दिन के कुछ पल माँ के नाम करते रहना ----

==================दिव्या ====================