Friday, 18 May 2012

एक कोलाज़ !!


एक कोलाज़ !!

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बिखरे सपनों को बटोर
-----टांक दिया ----------
कुछ यादें बीते पलों की
---रंग नहीं मिला
तो क्या ----हैं न
----दिल से रिसते खून
के कुछ छींटे -----
----बन गया न
कोलाज़ -----मेरी यादों का

=====दिव्या =========