Friday, 8 June 2012

बस इतना ही तो मानना है तुम्हें


बस इतना ही तो मानना है तुम्हें 

====================

हम हैं तो तुम हो
तुम हो तो हम
फिर कैसा अहम
बल से तो जीत सकते हो
नश्वर तन ---------
छल से बहका सकते हो भावुक मन
पर जीत तो तुम्हारी तब है
जब जीत लो मन -----
कैसा टकराव ये अहम का
अधूरा है वज़ूद
एक दूसरे के बिन
घर हमारा है--- हम दोनों का -------
बस इतना ही तो मानना है तुम्हें
मै तो तुम्हारी ही हूं
बंदनी नहीं-- सहचरी ---
प्रेयसी --पत्नी ----सहभागिनी
बस इतना ही तो जानना है तुम्हें 

========दिव्या ===============