Wednesday, 20 June 2012

और शाम निरुत्तर थी


और शाम निरुत्तर थी 

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वो कौन था ?
जो चला गया --बोलो न
पूछा मुझसे उकताई सी
बोझिल शाम नें -------
वो विगत था अतीत था
एक बेगाना सा पल था
वो कल था -------
---ह्म्म्म और क्या कहती
कुछ प्रश्नों के उत्तर ही नहीं होते न
-----तुम मेरी आँखों में नहीं पढ़ सकती क्या ?
और शाम निरुत्तर रह गई ---------------

---------------दिव्या ----------------------------