Wednesday, 20 June 2012

एतनी जल्दी बिसर गईल बबुआ


एतनी जल्दी बिसर गईल बबुआ 

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आज न जाने क्यूं मन कर आया
तुम्हरा हाल लेने को ---बस
सुबह की सैर तुम्हरी ही ओर
सोचा शायेद तुमहूं उदास होगे ----
----दबे पांव पहुंचे राउर घर
धीरे से खिड़की से ताका झांकी की
अरे तुम तो मगन थे ---परम प्रसन्न
--- न कोऊ की सुधि ---ना ही कवनो गम
अरे इका --- सब बिसर गईल का मीता ? ---
---हमसे तुम परेम नहीं किये थे का --
---चलो कवनो बात नहीं ----
बस तुम हमसे झूठं कहे बोले
हमका बस एतने माख अहे
---- तुम्हारे बोल झूठे निकरे
ई जनम ऊ जनम ----धत्त तेरी की
-----जनम जनम तो दूर तुम तो दुई दिन न याद करी सके ---अब का कहें
कुछ कहेंगे तो का फरक रह जायेगा ------
-------चलो खुस रहो सायद कबो कबो गलत कनेक्सन होई जात है न
कवनो माख नहीं ना ---बस पीर उठत है करेजे मा
लागल बा कवनो ठग लिहिल --चोराय लिहिस कुछू मन मा से
ऊ गवनई याद आई जवन राउर हमनीं के सुने का कहिन रहे
बस ---चलि आईं वापस रोअत गावत ---इहे गीत 

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---हंसी हंसी पनवा खियऊले बेइमनवां 

औ मारी रे करेजवा माँ ठेस ---

==============दिव्या =====================

आज व्यंग लिखने की गुस्ताखी की 

इन आज के फास्ट फूड जैसे रिश्तों पर ----:)))