Tuesday, 9 October 2012

वो मौन था ------


वो मौन था परन्तु ----
बोल रहा था उसका मौन
खीझ भी रहा था -और मैं
प्रस्तर प्रतिमा की भांति
खड़ी प्रयास कर रही थी
मौन की भाषा पढने की

आखिर वो बोल ही पड़ा
क्या तुम नहीं जानती
प्रेम है मुझे तुमसे --
परन्तु मै कह नहीं पाता
पता है कह देने से
वो बात कहाँ रह जाती है
तुम क्यूँ नहीं समझती
ये झुंझलाहट भी तो एक तरीका है
प्यार जताने का -------
वो भी बड़े हक़ से --------
-------------दिव्या ---------------------