Thursday, 8 November 2012

वो कैसी पागल लड़की थी


वो कैसी पागल लड़की थी
रोते रोते हंस पड़ती थी
तेज़ हवा को अक्सर वो
आंचल में रोका करती थी
रातों को जागा करती थी
तारों को गिनती रहती थी
वो चाँद से बातें करती थी
हर सुख दुःख बांटा करती थी
फूलों के बीच बैठ के वो
कांटो को संभाला करती थी
जब चाँद ने तोड़ा दिल उसका
वो फूट फूट के रोई थी
वो कैसी पागल लड़की थी
किन ख्वाबो में खोई थी
----------दिव्या ----------