Wednesday, 12 December 2012

कहाँ गए होंगे वो ----जो यहाँ सोये हैं


कहाँ गए होंगे वो ----जो यहाँ सोये हैं
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हर बेटी की तरह पिता के बहुत नजदीक रही
--------इसी माह में उनका जन्मदिन भी होता है
और इसी महीने में वो हमें सदा के लिए छोड़ गए थे
--------------- उनके जाने के बाद उन्हें
इलाहाबाद गंगा किनारे रसूलाबाद घाट पे ले
जाया गया -------/ जैसा की बंदिशे है लड़कियाँ औरतें
श्मशान नहीं जाती मुझे भी नहीं जाने दिया उनके साथ
--------उनकी अंतिम यात्रा में पर न जाने क्यूँ मन में
----------एक अजीब सी इच्छा थी वहां जरुर जाना है
उस जगह -------जहाँ आखिरी बार उनका शरीर था
फिर तो वह राख में बदल गया------ गंगा तट की वो जगह
भी जहाँ वो राख -----जो कभी मेरे पापा का वजूद था
बहाई गई बस छूना चाहती थी-------- वो जल जिसमे वो
मिल गए वो मिटटी जहाँ उनकी राख थी ---साथ ही
उस को भी जो इस दुनिया से जाने वाले हर मनुष्य का
वहां स्वागत करता है / बहुत डांट खाई पर आखिर गए
हम वहां उसी जगह उस मिटटी को छुआ भी मुझे पता था
इतने समय बाद तो न जाने कितने शरीर भस्म हुए होंगे यहाँ
पर न जाने क्यूँ मन में पिता का हाथ थामने जैसी ही अनुभूति लगी
नाव में बैठ गंगा में उसी जगह गए जहाँ से माँ गंगा उन्हें अपने
साथ ले गई थी पानी कमर से ऊपर था फिर भी उतर कर खड़े रहे
पिता से लिपटने का अहसास लिए / और उन्हें भी देखा जो श्मशान के
मेज़बान रहे उस समय / वो एक औरत थी सुना था पापा को देख
बस यही बोली अच्छा आप भी आ गए मंत्री जी ...--लोग उन्हें
महाराजिन बुआ के नाम से पुकारते थे ... अब नहीं रही पर मुझे नहीं
भूलती वह क्यूंकि मेरे पिता का अंतिम प्रयाण उन्ही के हाथों हुआ था ----
शमशान में बैठना वहां की शान्ति जिससे न जाने क्यों अधिकाँश लोग
भयभीत होते है ..मुझे अजीब सी शान्ति देती है मन के कुछ बोझ अगर
वहां उतरते है तो बहुत कुछ मिलता भी है जो बता नहीं सकते-------------
अक्सर वहां जाते भी है पर सबसे छुपा के --- ---------
एक नाम भी मिला अच्छा भी लगा ये अघोरन है या बंजारन ---
हमारे मसूरी वाले घर के बिलकुल पास कैमिल्स बैक रोड पे
एक ग्रेव यार्ड है अंग्रेजो के जमाने का --वहां बहुत खुबसुरत
कब्रें बनी है उन पर लिखी इबारतें पढना कभी कभी
अकेले वहां अकेले बैठना --भी एक अलग अनुभव एक
असीम शान्ति मिलती है अक्सर वहां बैठ कर उन्ही से
सवाल करती आप लोग तो यहाँ सोये हो फिर कौन है
जो चला गया ----------
------------------------दिव्या ------------------------------