Monday, 14 January 2013

उफ़ कैसे हो तुम एकदम ट्रेडिशनल सैडिस्ट से - ?


उफ़ कैसे हो तुम एकदम ट्रेडिशनल सैडिस्ट से - ?
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तुम मेरी पतंग को हमेशा काट क्यूँ देते हो ? 
क्यूँ नहीं उड़ने देते मुक्त आकाश में 
उसमे में मै खुद को महसूस करती हूँ न 
पर तुम ---बस हो न वही --ट्रेडिशनल पुरुष 
कांच वाला तीखा मांझा लाकर चुपके से -
अरे ना ना सीनाजोरी से काट देते हो 
मेरी पतंग मेरी उड़ान ---कैसे हो तुम 
एकदम सैडिस्ट --छीन लेते हो मेरा आकाश 
कोई कैसे मुस्करा सकता है --किसी के आंसू पे 
इसी लिए तो तुम्हे सैडिस्ट कहा -- हो न तुम एकदम वही .
एक बात कहूँ सुनो ---अब ज्यादा खुश न हो 
अब मेरी कोई उड़ान तुम नहीं रोक पाओगे 
मैने तुम्हारे तीखे वारो से बचना सीख लिया 
तुम्हारा कांच वाला मंझा मेरी पतंग नहीं काट सकता 
उसे मुक्त गगन के इन वारो से बचना आ गया है 
क्या कहा तुम ने अभी मैने क्या कहा ? 
अरे वो तो मै ...छोड़ो जाने दो --अच्छा बता दूँ 
तुम्हारे चेहरे के एक्सप्रेशन देखना था मुझे :)
अरे मुस्कान गाएब क्यूँ ---बत्तीस नहीं तो 
सोलह ही दांतों से मुस्करा दो --:))))
------------------------दिव्या ----------------------
पेंटिग अज्ञात कलाकार ---गूगल से साभार 
14.1.2013