Sunday, 10 February 2013

तुम क्या जानो --अगर जानते तो -


गुलमोहर की छतनारी छाँव में 
बैठ कर ग्रीन टी पीते हुए 
मैने पलके झुका कर 
चेहरा बाई तरफ घुमा लिया 
दाहिनी तरफ तुम जो थे 
मै नहीं चाहती थी तुम देखो 
मेरी आँखों में गुलमोहर का 
दहकता लाल रंग उतर आया है 
छोडो तुम नहीं समझोगे 
अगर समझते तो --मै 
नजरें ही क्यूँ फेरती ही 
--------दिव्या ----------------
 10.2.2013