Thursday, 21 February 2013

एक मुट्ठी अहसास --------


एक मुट्ठी अहसास
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एक मुट्ठी अहसास ------
----------ढेर सारे शहद से
मीठे बोल जिन्हें --------
---------सुन बिन पिए ही
नशे में रहती थी मै -------
---------एक चुटकी मुस्कान
तुम्हारी सड़ी सी बेरुखी ---------
-----------सब बटोर कर मैने
पोटली में बांध के ----------
----------हवा को सौंप दिया
मेरे शहर की हवा भी इमानदार है
------------------वो पहुंचा देगी तुम तक
अब क्या करुँगी इनका ---------------
-------------तुम्हारा था तुम ही रख लो
मुझे लगा ये सच्ची है ----------------
-------------और अपना समझ बैठी
दर्द होता है इन्हें देख के ----------------
---------------अब मै भूलना चाहती हूँ
वो सब कुछ जो -------------------
----------मेरे लिए खूबसूरत सच था
और तुम्हारे लिए बस---------------
-------------यूँ ही  कामन सी  बातें
तुम बस एक छोटा सा -----------
--------काम कर देना वक्त मिले तो
बस मेरे लिए दुआ करना-------------
------------------मै तुम्हे भूल जाऊं
बस ये पहला और आखिरी ------
----------------काम जो तुमसे कहा
-----------करोगे न ???????
------------दिव्या --------------------

4 comments:

  1. अद्भुत , अति उत्तम , क्या कहे इस रचना के बारे में शब्द ही नहीं मेरे पास तो
    मेरी नई रचना

    खुशबू

    प्रेमविरह

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    1. हार्दिक धन्यवाद दिनेश पारिख जी ---

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  2. झूठे अहसासों को भुला देने में ही भला है..
    हलाकि यह मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं...
    भावपूर्ण रचना...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया रीना जी --

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