Sunday, 24 February 2013

सपनों को खुला छोड़ दो -- :)

सपनों को खुला छोड़ दो -- :)
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आँख खुलते ही आज मूड खराब था
रात भर सपने बड़े अजीब से आये
न जाने कहाँ कहाँ भटकती रही
सारी रात सपने में उलझती सुलझती
अनजाने शहर में अनजाने लोगों के बीच
पर्स खाली क्रेडिट /डेबिट कार्ड दोनों ही नहीं थे
चंद दस के नोट और रेजगारी इससे फ्लाईट तो दूर
कोई बैलगाड़ी में भी न बिठाए --कितनी उलझन रही
नहीं कह सकती कितनी भारी गुजरी रात --
डरी सहमी जैसे न जाने कहाँ गुम हो गई थी मै उफ़ --
सुबह उठते ही सर भारी --मूड इतना ऑफ था कि
बेड टी लाने वाले ने भी तगड़ी झाड़ खाई --
फिर अफ़सोस हुआ ये बिचारा क्या करे -----
जल्दी से एक Parafizz ---पानी में घोल के पी ली --
चाय तो बस युही उड़ेल ली हलक में
छोटी सी  एक नींद और  कुछ देर की बस --
फिर  उठ कर काफी बेहतर लगा --झट से ब्लैंकेट फेका
सोचा आज गाने सुनते है --ब्रेकफास्ट गया भाड़ में
लाईट म्युज़िक अपनी पसंद के O.P.Nayyar -- आशा -रफ़ी के गाने
मन के तार झनझनाने वाले गीत
बजते ही मन के साथ मै भी झूमती हूँ न
सोचा डस्टिंग भी कर डालूं --- तुम्हे तो पता है
जब मै बहुत खुश होती हूँ तो सफाई करती हूँ
वो कबर्ड की हो या जिंदगी में जमी धूल की
मै गाने की रिदम पे कभी डस्टर मारती
कभी सब छोड़ कर डांस करती कदम थिरकते
फुल मस्ती --धूल जो हटानी थी ----सब ओर से
एक परत सी जम गई थी चारो ओर कुछ नहीं दीखता था
----और पता है गाने के बोल कौन से ---
-- आसमा के नीचे हम आज अपने पीछे
प्यार का जहाँ बसा के चले / कदम के निशां
बना  के चले / धूल तो झड़ गई पर
अपने निशान छोड़ गई ---उफ़
क्या ये हल्के होंगे कभी सोचने लगी मै
तभी एक हाथ बढ़ा और मेरा हाथ पकड के अपनी ओर
खींचा बोला सुनो उठो चलो पलट के देखना
अच्छी बात नहीं --सपनों को खुला छोड़ दो
अगर तुम्हारा है तो कहीं नहीं जाएगा
वरना किसी और आँख में बस जाएगा
मै हूँ न तुम्हारा दोस्त ---पक्का वाला
और वो बदमाश मेरी आँखों में झांक के बोला
आप से भी खूबसूरत आपके अंदाज़ है -- :))
मेरी आँखे नम थी पर होठ मुस्करा दिए
------------------------दिव्या -----------------
24-2-2013
Time --- 6.30 -pm
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