Wednesday, 6 February 2013

भोर तो आ के रहेगी ---


भोर तो आकर रहेगी
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कितना भी हो घना अँधेरा
सुबह कुहासे की चादर फाड़
सूरज धीमी धीमी मुस्कान
बिखेरेगा ही -------------
भोर तो आकर रहेगा
मुझे मेरा मन कभी दुलार से
तो कभी डांट के समझाता है
पता है वो सच कह रहा है
नहीं निकल पा रही हूँ मै
उन लछमण रेखाओं के बाहर
जो मैने खुद ही खींच ली थी और
खुद को तुम्हारे साथ ही बंद कर लिया था जिसमें
क्या बताऊँ ? तुम्हें भी बताना होगा क्या
तुमको समझने में मै खुद को भूल गई थी
आशा और निराशा धूप छाँव सी आती जाती है
पर मुझे पता है वक्त लगेगा थोड़ा
लेकिन मैं निकल आऊँगी बाहर
अपनी ही खींची हुई परिधि से
तुम वापस आओगे जरुर पता है मुझे
पर तब तक कहीं पाषण न हो जाये
यह हर्दय जिसमे तुम थे तुम हो अभी भी
यह भी सत्य है तुम्हारी याद की गंध
हमेशा मेरे साथ ही रहेगी और साथ ही जायेगी
एक अकुलाहट सी होने लगी है अब
आखिर मेरे ही साथ क्यूं यह सब ??
क्यूं की अभी भी जब इतना समय गुज़र गया
काले केशों में चांदी भी उतरने लग गई
फिर भी मुझे किसी को छलना नहीं आया
चलो हर्दय का वह दरवाज़ा बंद ही कर देते है
जहाँ पीड़ा स्नेह अनुराग जा कर बैठ जाते हैं
न जाने क्यों इस मौन निशा में
मेरा मन इतना भर आया कब से तुम से
न जाने कितनी बातें करती रही और
समय का पता ही न चला की कब भोर हो गई
न जाने कितने जन्मों का नाता जो है तुम से
यह भी भूल गई तुम तो यहाँ नहीं हो
पर न जाने क्यूं लगता तुम यही मेरे पास ही हो
सुनो मेरे पास ही हो यह अहसास ही काफी है
हम रोज़ इसी तरह बातें करेंगे मुझे पता है
तुम सब सुन रहे हो न क्यूं की तुम तो
हमेशा मेरे साथ ही रहते हो -रहते हो न ??
-----------------दिव्या -----------------------------
पेंटिग --अज्ञात कलाकार

6.2.2013

20 comments:

  1. ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई...शब्द शब्द दिल में उतर गयी.

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    1. संजय भास्कर की आपका बहुत बहुत आभार ---

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  2. भावों से नाजुक शब्‍द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........

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    1. आपकी सब की प्रतिक्रियाएं लिखने का हौसला देती है --आभार

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  3. मन के भावों को खूबसूरती से उकेरा है .... भोर तो आएगी ही निश्चित है ये ।

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    1. हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया --संगीता स्वरूप जी

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  4. जानिए मच्छर मारने का सबसे आसान तरीका - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. ब्लॉग बुलेटिन में स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद --

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  5. Replies
    1. हार्दिक आभार मुकेश जी ---

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  6. शानदार अभिव्यक्ति | आभार

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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    1. शुक्रिया तुषार जी --आपका धन्यवाद

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  7. भावपूर्ण और बहुत प्यारी रचना |

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    1. प्रदीप जी बहुत बहुत शुक्रिया ---

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  8. मन के भावों को सहजता से रचना में रच दिया आपने
    Latest postअनुभूति : चाल ,चलन, चरित्र (दूसरा भाग )

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    1. हार्दिक धन्यवाद कालिपद जी --

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  9. व्यग्र हो रातें बितायें,
    स्वप्न में या बीत जायें,
    समय टिक टिक बढ़ रहा है,
    भोर तो आकर रहेगा।

    बड़ी सुन्दर पंक्तियाँ..

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    1. सुंदर पंक्तियों के लिए आपका भी आभार प्रवीण जी --

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  10. बहुत ही प्यारी कोमल अहसास लिए भावपूर्ण रचना...

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    1. दिल से शुक्रिया आभार रीना जी --

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