Saturday, 23 February 2013

अभी कुछ बाकी है - - - - -


अभी कुछ बाकी है
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सब समाप्त होने के बाद भी
अभी कुछ बाकी है --------
इक हिकारत भरी नजर
डालनी है ----
--तुम्हारे क्षुद्र अह्म पर
---पुराने पन्ने पलटनें हैं
और सूखी यादें निकाल
फेंकनी है --सोचती हूँ
आज कर डालूं ये
बहुत दिनों से पेंडिग पड़ा है
लो ! गर्म ग्रीन टी के हर सिप के
साथ एक एक गिरह खोल दी
जो मकड़ी के जाल की तरह
लिपटी थी मुझसे ---और हाँ
कप की तलहटी में बची
ठंडी बेस्वाद चाय
उड़ेल दिया उस अंगारे पर
जो सब कुछ राख हो जाने
के बाद --कहीं सुलग रहा था
चलो अब चैन से ---
अपनी ग्रीन टी तो पी सकुंगी
हर सिप का मज़ा ले कर ---:)
-----------दिव्या ------------------

23-feb -2013