Friday, 29 March 2013

वो बूढा पीपल बहुत उदास है --और मै भी


वापस आते हुए इस बार

मै लिपट के बहुत रोई थी

तभी से मेरे मायके का वह

बूढ़ा पीपल बहुत उदास है

माँ और मायका तो बस अपने

आंचल में ही बाँध लाई हूँ

उस दिन वापस आने के लिए

मै बस उठी ही थी माँ के पास से

तो लगा मेरा आंचल अटक गया है कहीं

पलट कर देखा मुट्ठी में दबाया था मम्मा ने

मैने कहाँ अब चले जल्दी आयेंगे

माँ ने आंसू भर के देखा और

बस इतना ही बोली मत जाओ अभी

पांच दिनों से कुछ नहीं बोली थी माँ

आते समय मत जाओ सुना --और मै

नहीं आ पाई ---बीस साल हो गए

बाबा को गए वो अचानक ही

हम सब को छोड़ के चले गए

जानते थे न मै नहीं जाने दूंगी उन्हें

इसीलिए  मुझे बिना बताये ही चले गए

अक्सर जब नाराज होते भाई पर तो कहते

मै चला जाऊंगा चुपके से तब पता चलेगा

और मै जोर से हसंती कैसे जायेंगे

आपकी अटैची तो मै ही लगाती हूँ

मै समान तैयार ही नहीं करुगी फिर

आप क्या करेंगे --पर वो सच में

बस बिना बताये चुपके से चल दिए

न जाने कहाँ --मै बहुत रोई

पर नहीं वो आये  वापस --

मुझसे बहुत प्यार करते थे

पर न जाने कैसे इतने  निष्ठुर हो गए --और मै

अचानक बहुत बड़ी हो गई

अपनी उम्र से कहीं गुना बड़ी

उनकी जगह ले ली पर आप मुझे

बहुत याद आते है ----पता है बाबा

वो पेड़ जो आपने लगाये थे --

उन्हें छू कर लगता है आपको छू लिया

इसीलिए तो जब लिपट कर रो आई

पीपल से तो ऐसा लगा मेरे मायके के

बुजुर्ग ने गले से लगा करमुझे  अंकवार दी है

----------------Divya Shukla------------

30 -3-2013