Friday, 5 April 2013

विंटर सिंड्रोम --या अतीत के धागे ---


विंटर सिंड्रोम --या अतीत के धागे ---

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ठंड ने बरसों का रिकार्ड तोड़ दिया

टी वी चीख रहा है और मै

ब्लैंकेट लपेटे अभी भी बिस्तर में हूँ

एक अवसाद सा है शायेद विंटर सिंड्रोम ही हो

जिंदगी परत दरपरत --फिर खुल गई

पलट रही ही थी बंद पन्नो को --

अतीत के उलझे धागों का सिरा

नाख़ून में फंस कर उधड़ने लगा

पीछे मुड़ कर देखने का मन नही

फिर एक टीस सी उठी अचानक ---

पीले जर्जर पन्ने फडफडा कर

खुदबखुद पलटने लगे --

उस उम्र में अमूमन लड़कियां

अपने एम्बिशन में लगी रहती थी

या फिर उन हैंडसम बोयज़ के बारे में

जो सिर्फ स्कूल आते और छुट्टी के वक्त

नियम से खड़े रहते थे बस दूरदर्शन हेतु

छोटे से शहर में इतना बहुत था --

फिर अचानक मेरा प्रमोशन हुआ

इस प्रमोशन नें बहुत कुछ छीन लिया

जैसे गर्म पुलोवर बुनते बुनते

सलाइयों से कुछ फंदे फिसल जाएँ

और तैयार पुलोवर में छेद नजर आये

ऐसा की ऊन का एक सिरा खींचते ही

पूरा स्वेटर खुल जाए ---वक्त गुजरता रहा

और सब देखो और मौन साध लो

इसी तर्ज़ पर जिंदगी खिसकती रही

कीचड़ से खुद को बचाते हुए भी

परिवार में चकरघिन्नी बनी रही -----
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और समाज में उफ़ सो काल्ड इमेज़ का भी ध्यान --

पर इन सब के बीच होने वाले अनुभव

उफ़ कैसा कैसेला कड़वा स्वाद छोड़ गए जीवन में

मेरा परिवार मेरा परिवेश राजविलास सी जिंदगी

ऐसे में अर्थहीन होता मेरा जीवन --किसी ने सोचा ?

किसी की मधुर दस्तक से कभी भावनाओं में बहती गईं

खुद की पाली हुई एक्सपेक्टेशन को दरकते देख

अचानक हल्के से झटके से बिखर भी जाती

फिर एक बेवकूफी भरा ख्याल आता

काश की मेरा कोई पहला प्रेमी होता

अचानक आता और कहता --सुनो

तुम कब तक मुझे इग्नोर करोगी

तुम मुझे यूँ ही उलझी सुलझी सी

बेहद मूडी विगत सहित ही मिल जाओ

और मै तब --न जाने क्या कहती

न जाने क्या करती ----

या शायेद उसे ही देख के

मुस्करा भर देती -----:))))

वरना यह अतीत के धागे तो अब

बढती उम्र का अहसास कराने के साथ

दिल पे एक खरोंच डाल जाते है

पतंग के मांझे की तरह -----

---------Divya Shukla--------------

9-1-2013

पेंटिग  गूगल  से
कलाकार  अज्ञात 

2 comments:

  1. आज की ब्लॉग बुलेटिन क्यों 'ठीक है' न !? - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. bahut badiya rachna .. ateet ke dhaage kuchh suljhe kuchh toote kuchh bikhre .. kuchh bhool gaye kuchh yaad rah gaye .. aur kabhi kabhi toh koi dhaga poori tarah missing :)

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