Sunday, 4 August 2013

सुन ऐ रूह मेरी -



मै हूँ एक जर्रा

------या नूर 


हूँ फलक का

मेरी रूह आई कहाँ से ?

-----आईने में खुद को देखूं

ये जर्द सा मेरा चेहरा

-----पुरनम सी मेरी आँखे

मुझसे ही सवाल पूंछे

-----वो कहाँ है तेरी मंजिल

तुझे जाना था जहाँ पे

-------सुन ऐ रूह मेरी

खुद की खुदी को मैने

-------ख़ाक में मिला दिया है

सारा वज़ूद मेरा

------अब बस धुआं धुआं है

------Divya Shukla-------

5.8.2013

तस्वीर गूगल से