Saturday, 24 August 2013

पुराने संदूख से मिला खत !!

पुराने  संदूख से मिला खत !!
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पुराने कागजो मिली आज ----------

----------बरसों पहले मुझे ससुराल में

लिखी माँ की पहली चिट्ठी ------------

---------कितनी नसीहतें है इसमें

कुछ प्यार भरी धमकी भी ------------

------------ठीक से रहना ससुराल है तेरा

जोर से मत हंसना -धम धम कर के भाग दौड़ न करना

पता नहीं तुझे कब अक्ल आएगी समझती ही नहीं

हे भगवान ये पागल गुड़िया भी छुपा कर ले गई अपनी

अच्छा सुन उसे निकाल कर खेलना मत बेटा

वरना सब तेरे पापा और माँ को कहेंगे --------

कुछ सहूर ही नहीं सिखाया इसकी माँ ने ------

कोई शिकायत न आये वहाँ से समझी ?

रोज सुबह उठ कर सब बड़ों के पैर जरुर छूना

भूलना मत सबके पैर छूना समझ रही है न ?

तुझे समझया था -- मुझे याद आया माँ ने

विदा के समय बड़े धीमे से कान में कहा था कुछ

फिर मुझे हंसी आ गई ----वो सब याद करके

जब मैने तिनक के कहा था क्या इस लड़के के भी

न नहीं बिलकुल नहीं छूना मुझे नहीं करुँगी जाओ

माँ का चेहरा पीला पड़ गया न जाने यह क्या करेगी

कोई अक्ल सहूर भी नहीं इसे मना किया था

मत करो इसकी शादी अभी से -----

हाथ में कांपता हुआ माँ की चिट्ठी का

ये पीला जर्जर कागज़ लग रहा है

मानो मेरी बीमार माँ का कमजोर चेहरा हो

वो आज भी पीला पड़ जाता है मेरी चिंता में

चिट्ठी के पीले पड़े कागज़ में दो बूंद आंसूओं के निशान हैं

उन्हें छुआ वो अभी भी नम है -----

बस दो बूंद ढलक गई मेरी आँखों से --

बुदबुदा उठी ओंठो में इक हूक सी उठी कलेज़े में

माँ इस बार जल्दी आउंगी मै -तुम्हारी गोद में सर कर

रोना है मुझे -- ढेर सारी बातें करनी है

और वह गुड़िया उसकी सीवन उधड़ गई है

फिर भी सहेज़ रखा है तुमने बनाई थी न

इस बार आउंगी उसे फिर से सी देना

तुम सी दोगी न माँ --मै फिर से जी लुंगी

अपना अधूरा छूटा बचपन ----- !!

-----------Divya Shukla------------
24-8-2013

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