Thursday, 5 September 2013

और मैने वो इंतजार लिखवा लिया !!

और मैने वो इंतजार लिखवा लिया !
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--------मैने हाथों में मेहँदी रचाई

हिना की खुशबू  में मदहोश---------

-----भटकती रही -रात भर

न जाने कहाँ कहाँ -

--उफ़ कितना सुर्ख रंग चढ़ा

मेरी हथेलियों पे

और सोचने लगी ऐसा कैसे हुआ

सुना है सुर्ख हिना तो इश्क की

गरमी से रंग लाती है

हैरान परेशान सी मै-

-अनगिनत सवाल लिए

अपने रब से ----रूठ रूठ के-

कौन है वो ?-----कहाँ है वो ?

जिसे तूने मेरे लिए बनाया है

और ये हिना क्यूँ सुर्ख उतरती है

मेरी हथेलियों में बोलो ना ?

न जाने कब तक उलझती रही

अचानक आवाज़ आई ---

देख मैने ना जाने कब से

गूंध कर रखी है ये मिटटी

पर पुतला न बना पाया

आह पता है क्या कहा

मेरे प्यारे रब ने ---

अरे पगली मांगे भी तो

कितनी अजीब हैं तेरी

अब कहाँ मिलता है ये सब

अब कैसे बनाऊं जैसा तू चाहे है

मिटटी गूँधी है पर खोजे से भी

न वफ़ा मिली न वो मोहब्बत

अब तू ही बोल बना दूँ या

फिर लिख दूँ तेरे हिस्से में

एक और जनम का इंतजार

और मैने वो इंतजार लिखवा लिया

अपने हिस्से में एक और

जनम का लम्बा इंतजार

-------Divya Shukla----------

5.9.2013

पेंटिग गूगल से आभार --