Wednesday, 16 October 2013

जिंदगी अब जिद नहीं करेगी !!




 जिंदगी अब जिद नहीं करेगी

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कल रात टुकडो में

टूट टूट कर बिखरता रहा चाँद

और जिंदगी बेबस सी देखती रही

जैसे खुद उसका दर्द पी रही हो

हर एक टुकड़े पे कुछ लिखा था

कुछ माफियाँ थी कुछ तलाफियां भी

किसी पे बेबसी तो कई पे दुश्वारियां थीं

गलतफहमियां थी और लाचारियाँ भी

पर नहीं थी तो किसी टुकड़े पर

नफ़रत नहीं थी ---बहुत ढूंढा

तो एक नन्हा सा टुकड़ा चमका

धुंधले अक्षर में मोहब्बत लिखी थी

जिंदगी की आँख से टपके दो बूंद

आंसू सब कह गए बिन बोले -----

--जिंदगी अब जिद नहीं करेगी

चाँद के टुकड़े बटोर के ---फिर से

एक नया चाँद बना देगी

------Divya Shukla-------

15-10-2013

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