Wednesday, 11 December 2013

सुनो तुम भी अब न कहना





सुनो अब न कहना
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मुझमे मेरापन मर सा जाता है

जब भी तुम कहते हो अब नहीं बोलूँगा तुम से

प्यार भरी तकरार और फिर मै करू मनुहार

जिंदा रखते है हमारे - अहसासों को

वरना एक सहमा सा सन्नाटा फैल जाता है

और मै वो ढेर सारी बातें भूल जाती हूँ

जो तुमको बतानी होती है तुमसे बांटना चाहती हूँ

यह सोच के चुप सी साध लेती हूँ

पर तुम न जाने किस पल तुनक जाओ

कहा न कोशिश करुँगी मेरे अंदर का बचपन मर जाये

फिर तो मै खामोश खामोश ही रहूंगी न

पर सुनो देखो तुम भी अब  न कहना

नहीं बोलूँगा तुम से --

------Divya Shukla-------

12-12-2013

तस्वीर गूगल से