Friday, 13 December 2013

एक बात पूछूं -उत्तर दोगे ??




एक बात पूछूं -उत्तर दोगे ?

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सुनो ! कुछ कहना है मुझे

न जाने कितने दिनों से

स्वयं को बहुत टटोला मैने

अंतर्मन से न जाने कितने

प्रश्नोत्तर किये और फिर

डोलता रहा मन उहापोह में

असंख्य बार तुम्हारी आँखों में

वही चिरपरिचित प्रश्न पाया

न जाने कब से शायेद युगों से

जिसका उत्तर अधरों में मिंचा

ही रहा बहुत प्रयास के बाद

भी देने का साहस नहीं कर पाई

कदाचित  नहीं देना ही नहीं चाहा

परंतु आज मै स्वयं तुमसे

तुम्हारी आँखों में आँखे डाल कर

बिना किसी भय और कुंठा के

कहती हूँ अब सुनो -- तुम

हाँ नहीं हूँ मै सीता कहा न नहीं हूँ

और तुम्हारी खींची हुई परिधि

के भीतर रहना भी मेरी नियति नहीं

मुझे अपना मान स्वयं प्रिय है

अब तुम मेरे प्रथम और अंतिम

प्रश्न का उत्तर दे दो -

बोलो दोगे न -छोटा सा प्रश्न है

क्या तुम राम हो ??

तुम्हारे उत्तर की प्रतीक्षा में हूँ

क्या तुम राम हो बोलो ??

------Divya Shukla -----


13-12-2013

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